योजनाओं में घुटती रही है जिंदगी

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प्रश्‍न

सद्‌गुरु, मैं अपने जीवन के लिए योजना बना रहा हूं लेकिन मैं इन योजनाओं में इतना उलझता जा रहा हूं कि मेरे मन मुताबिक अभी भी कुछ नहीं हो रहा। मैं क्या करूं?

सद्‌गुरु

दरअसल योजना वह चीज है जो आपके मन में होती है। पर करते आप वो हैं जो आपके हाथ में होता है। आप कितना समय योजना बनाने में लगाते हैं और कितना काम करने में यह हर व्यक्ति को अपने जीवन के अनुसार, अपने काम-काज के अनुसार तय करना होता है।

अगर आप योजना आयोग में काम करते हैं तो आप केवल योजना ही बनाते रहते हैं – क्योंकि वही आपका काम है; योजना को अमल में लाना किसी और का काम है। आपका काम चाहे जिस भी तरह का हो जीवन की प्रकृति ही ऐसी है कि आप बस इस वक्त में ही कुछ तय कर सकते हैं। इस वक्त खाना खा सकते हैं, अभी सांस ले सकते हैं, इसी वक्त जी सकते हैं। योजना भी आप अभी बना सकते हैं। आप कल के बारे में योजना तो बना सकते हैं, लेकिन कल की योजना नहीं कर सकते। योजना महज एक विचार है। हम जो अब तक जानते हैं उसी के आधार पर आगे की योजना बनाते हैं। यानी एक तरह से हमारी योजना हमारे अतीत का ही एक सुधरा हुआ रूप है। योजना तो अतीत के एक टुकड़े को ले कर उसे सजाने-धजाने जैसी है। यह जीने का  सही तरीका नही है। हां, हमें योजना की जरूरत है लेकिन अगर आपकी जिंदगी आपकी योजना के मुताबिक ही चलती रहे तो इसका मतलब है कि आप एक बेचारगी वाला जीवन जी रहे हैं। आपके जीवन में कुछ ऐसा होना चाहिए   जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की हो।

हां, हमें योजना की जरूरत है लेकिन अगर आपकी जिंदगी आपकी योजना के मुताबिक ही चलती रहे तो इसका मतलब है कि आप एक बेचारगी वाला जीवन जी रहे हैं। आपके जीवन में कुछ ऐसा होना चाहिए जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की हो।

जीवन की संभावना इतनी अपार है कि कोई भी उस हद तक योजना नहीं बना सकता। इसलिए योजना को एक सहारे की तरह रखिए और जीवन को घटित होने दीजिए, जीवन अभी जैसा है उसमें नई संभावनाएं ढूंढ़िए। पता नहीं कब क्या सामने आ जाये। हो सकता है आपके साथ कुछ ऐसा हो जाये जैसा आज तक किसी के साथ न हुआ हो। लेकिन अगर आपकी जिंदगी आपकी योजना के अनुसार ही चलती रहे तो वही बेतुकी चीजें आपके साथ भी होंगी जो आज तक इस दुनिया में होती रही हैं। आपके साथ कभी भी कुछ नया नहीं होगा। अगर आपका जीवन आपकी योजना के अनुसार चलता रहे तो आपको प्रेम नहीं हो पायेगा, आपको आनंद की अनुभूति नहीं होगी, और आत्‍मज्ञान का तो सवाल ही नहीं है– क्योंकि यह आपकी कल्पना के दायरे में ही नहीं है। आप अपनी योजना के अनुसार औरों की तरह किसी लड़की या लड़के का हाथ थाम कर पेड़ के चारो ओर चक्कर लगा सकते हैं, गाना गा सकते हैं – लेकिन फिर भी आप नहीं जान पायेंगे कि प्रेम क्या होता है। आप अपनी योजना के अनुसार शादी तो कर सकते हैं – लेकिन आप नहीं जान पायेंगे कि प्रेम क्या है। आप बच्चे पैदा कर सकते हैं – फिर भी आप नहीं समझ पायेंगे कि प्रेम क्या है। जब प्रेम होगा तो अपने-आप होगा, आपकी योजना के अनुसार नहीं। यह आपकी योजना का हिस्सा हो ही नहीं सकता क्योंकि योजना तो सिर्फ आपकी पिछली जानकारियों और अनुभवों से ही बनता है। अगर आपकी जिंदगी आपकी योजना के अनुसार ही चलती रहे तो कभी कोई नयी चीज आपके जीवन को छू भी नहीं पायेगी।

इसलिए आपको जानना होगा कि किस हद तक योजना बनायें। अगर आपके पास किसी तरह की कोई योजना ही नहीं होगी तो आपको यह भी पता नहीं होगा कि कल क्या करना है। इसके लिए एक खास तरह का  संतुलन बनाना होगा, एक खास समझदारी से यह तय करना होगा कि किस चीज की योजना बनायें और किन चीजों को बस अपने आप होने दें। आप किसी महान दूरदर्शिता से अपनी योजना नहीं बनाते। दरअसल भविष्य की अप्रत्याशित घटना को झेल न पाने के भय के कारण आप योजना बनाते हैं। मनुष्य को बस एक ही तकलीफ है कि उनका जीवन वैसा नहीं चल रहा जैसा उसके विचार से उसको चलना चाहिए। बस इतनी सी बात है कि आपकी कोई बेकार-सी योजना साकार नहीं हो रही, कुछ उससे बहुत बड़ा साकार हो रहा है। आप सुबह-सुबह कॉफी पीना चाहते थे, कॉफी नहीं मिली तो आप दुखी हो गये। लेकिन जो इतना भव्य सूरज निकल रहा है उसे आप नहीं देख रहे हैं।

इस विशाल ब्रह्मांड में, जहां आपके चारों ओर जीवन का मनमोहक नृत्य चल रहा है, आपकी योजना एक निहायत मामूली-सी चीज है। उसको इतनी अहमियत मत दीजिए। हां, आपके पास इतनी योजना होनी चाहिए कि कल सुबह उठ कर क्या करना है; लेकिन कभी यह उम्मीद मत कीजिए की आपकी योजना के अनुसार ही सब कुछ हो और सबसे खास बात यह कि हमेशा यह सपना देखिए और प्रार्थना कीजिए कि आपका जीवन आपकी योजना, आपकी कल्पना और आपकी उम्मीदों से कहीं ज्यादा ले कर आये। अगर आपका जीवन आपकी योजना के अनुसार चलता है तो फिर वह एक दुखी जीवन होगा।

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