भावना, मस्तिष्क और शरीर हैं मौलिक शक्ति

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प्रश्न – क्या भावनाएं आध्यात्मिक उन्नति के रास्ते में रुकावट हैं?

सद्‌गुरु – अगर किसी इन्सान के अंदर कोई भावना नहीं है, तो आप उसे इंसान कह ही नहीं सकते। जिन लोगों ने आपको यह बताया है कि भावनाएं आपकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक हैं, वही लोग यह भी कहेंगे कि आपका मस्तिष्क भी एक बाधा है। फिर वे आपसे कहेंगे कि आपका शरीर भी बाधा है। एक तरह से तो यह सच है। आपका शरीर, आपका मस्तिष्क, आपके भाव, आपकी ऊर्जा -ये तमाम चीजें या तो आपके जीवन में बाधा बन सकती हैं या फिर आगे बढ़ने की सीढ़ी बन सकती हैं। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप उनका इस्तेमाल किस तरह करते हैं। लेकिन अगर आपको ये तीनों बाधा की तरह लगती हैं, तो यह भी जान लीजिए कि दुनिया में यही तीन क्षमताएं हैं, जिनसे आपको काम लेना है। इनके अलावा, आपके पास और कुछ है नहीं। आपके भाव आपके विचारों से अलग नहीं होते। जैसा आप सोचते हैं, वैसा आप महसूस करते हैं। भाव विचारों का रसीला अंश होते हैं। जो आप सोच नहीं सकते, उसे आप भावों के तौर पर व्यक्त भी नहीं कर सकते। अगर मैं किसी के बारे में यह सोचूं कि वह बहुत भयानक है, तो क्या उसके बारे में अच्छे भाव व्यक्त कर सकता हूं? नहीं। तो अगर आप कहते हैं कि सभी भाव बाधा हैं, तो आपको अपने विचार भी हटा देने चाहिए। मस्तिष्क को काबलियत के इस स्तर तक लाने में लाखों सालों का समय लगा है और अब आपको लगता है कि आपका मस्तिष्क समस्या है। समस्या मस्तिष्क नहीं है, समस्या यह है कि आपको यह नहीं पता कि उसका इस्तेमाल किस तरह करना है। मानिए कि आपको गाड़ी चलानी नहीं आती और हमने आपको तेजी से चलने वाली एक कार दे दी। अब यह कार न सिर्फ आपकी, बल्कि दूसरों की जिंदगी के लिए भी समस्या बन जाएगी क्योंकि आपने कार चलाना नहीं सीखा। तो समस्या की वजह मशीन नहीं है। इसी तरह इन्सानी दिमाग कोई समस्या नहीं है। यह तो एक शानदार यंत्र है, एक जीता जागता चमत्कार। भावनाएं मानवीय जीवन का एक खूबसूरत पहलू हैं। अगर भावनाएं न हों तो लोग बदसूरत हो जाएं। लेकिन अब दोनों आपके लिए समस्या बन गए हैं, क्योंकि आपने इन्हें संभालने का तरीका सीखने की कोई कोशिश नहीं की। दुनिया में 90 फीसदी लोगों को सिर्फ भक्ति और प्रेम सिखाया जाता है, क्योंकि भक्ति के जरिए आप अपनी भावनाओं को जितना चाहें, उतना खूबसूरत बना सकते हैं। अगर आप लगातार नाराज हैं, कुंठित हैं, हताश हैं, नफरत से भरे हैं, तो यह आपके विकास के लिए काम नहीं करेंगी। लेकिन अगर आप अपनी भावनाओं को आनंद, दया और प्रेम से भरपूर बना लेते हैं तो वे आपके उत्थान की सीढ़ी बन जाएंगी।

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