ओमकार ध्यान पर रिसर्च से मिली जानकारियां

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लेडी इर्विन कॉलेज, नई दिल्ली द्वारा किये गये एक अध्ययन में पाया गया है कि ईशा का ओमकार ध्यान करने वाले खिलाड़ियों में उनके शरीर में पानी के स्तर की जागरूकता बढ़ जाती है। प्रस्तुत है डॉ. प्रीति ऋषि लाल द्वारा की गई रीसर्च के कुछ तथ्य:

लेडी इर्विन कॉलेज, नई दिल्ली द्वारा किये गये एक अध्ययन में पाया गया है कि ईशा के ओमकार ध्यान को करने वाले खिलाड़ियों में उनके शरीर में पानी के स्तर की जागरूकता बढ़ जाती है। चिकित्सकीय एवं खेलकूद पोषण के बारे में डॉ. प्रीति ऋषि लाल द्वारा किये जा रहे एक लंबे अनुसंधान के एक भाग के रूप में यह अध्ययन वर्ष 2011 में दो महीनों के लिये किया गया। उनकी अनुसंधान रिपोर्ट उस वर्ष अक्टूबर माह में इलियोनिस, अमेरिका में हो रही “इंटर्नैशनल कॉन्फ़्रेन्स ऑन फ़ूड स्टडीज़” में प्रस्तुत हुई। यह अध्ययन, जो सुश्री आँचल अग्रवाल के मास्टर्स शोधपत्र में भी प्रकाशित हुआ है, युवा पुरुष हॉकी खिलाड़ियों की पानी पीने की आदतों को सुधारने के उद्देश्य से किया जा रहा था। ये खिलाड़ी भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित ‘आओ और खेलो’ योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण ले रहे थे।

परीक्षणों से यह भी पता चला कि ध्यान करने वाले खिलाड़ियों की शारीरिक फुर्ती तथा हृदय की धड़कनें भी बेहतर थीं। ये खिलाड़ी ज्यादा खुश और शांत थे, और खेल पर उनका ध्यान बेहतर केंद्रित था।

ओमकार क्यों ?
सुश्री अग्रवाल एवं डॉ. प्रीति लाल ने पाया कि खिलाड़ियों को पानी पीने के बारे में अच्छी तरह शिक्षित करने के बाद भी अधिकतर खिलाड़ी खेलते समय शरीर में निर्जलीकरण अर्थात पानी की कमी हो जाने की समस्या से ग्रस्त थे, जिससे उनके खेल प्रदर्शन और शारीरिक योग्यताओं पर खराब असर पड़ रहा था तथा उनके लिये लंबे समय की बड़ी स्वास्थ्य समस्यायें खड़ी हो रहीं थीं।

डॉ. लाल कहती हैं, “खिलाड़ियों को उनके शरीर की पानी की ज़रूरतों के बारे में पहले से समझाया गया था। प्रदर्शन(डेमो) के द्वारा भी सिखाया गया था तथा सारी जानकारी भी दी गयी थी। जब हमने उनके शरीर की पानी की ज़रूरतों के बारे में उनकी जानकारी की परीक्षा ली तो लगभग सभी को 100% अंक मिले। वे जानते थे कि उन्हें क्या करना चाहिये पर वे बस सही चीजें कर नहीं रहे थे। तो ‘जानकारी’ एवं ‘व्यवहार में बदलाव’ को एक सही ढंग से जोड़ना ज़रूरी था। शरीर में पानी की प्यास के स्तर के बारे में जागरूकता आवश्यक थी”।

एक खिलाड़ी ने बताया कि अब घर पर सभी लोगों के साथ वह ज्यादा मेल-जोल से रह पा रहा था। इस प्रशिक्षण के दौरान इन सभी खिलाड़ियों की परिपक्वता बढ़ गयी थी। इस अध्ययन ने संभावनाओं का एक पूरा नया क्षेत्र खोल दिया है।

तो क्या ओमकार से इसका उत्तर मिल सकता था ?
ओमकार ध्यान प्रक्रिया के शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक फ़ायदों को पहले भी अनुसंधान द्वारा जाना गया है। सुश्री अग्रवाल एवं डॉ. प्रीति लाल, ईशा द्वारा सिखायी जा रही ओमकार ध्यान क्रिया एवं अन्य स्थानों पर सिखायी जा रही पद्धति के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहती हैं, “जहां हाल ही में एक भारतीय अध्ययन ने ॐ को एक अक्षरी मंत्र बताया है, वहीं ईशा में इसे तीन अक्षरी मंत्र (आ, उ, म) के रूप में सिखाया जाता है”। शाम्भवी महामुद्रा के लाभदायक असर पर किये गये अध्ययनों का संदर्भ देते हुए, डॉ. लाल कहती हैं, “यह पता चला है कि ओमकार को सम्मिलित करने वाली यौगिक प्रक्रियाओं से मस्तिष्क बेहतर ढंग से कार्य करता है”। यह एक मुख्य कारण था कि इन अनुसंधानकर्ताओं ने अपने ‘शरीर जलयोजन अध्ययन (बॉडी हाइड्रेशन स्टडी)’ में जानकारी एवं व्यवहार के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिये ओमकार ध्यान क्रिया को चुना।

प्रयोगात्मक अध्ययन के दौरान 30 खिलाड़ियों को दो समूहों में बाँटा गया था। एक था ‘नियंत्रण दल’ जिसे पूर्व प्रचलित, पर्याप्त पानी पीने की जानकारी देने वाली पद्धति से प्रशिक्षित किया गया। और दूसरे, ‘प्रयोगात्मक दल’ को इस जानकारी के साथ साथ 21 दिनों तक रोज 21 मिनट का ओमकार ध्यान भी कराया गया। 21 दिन की अवधि की समाप्ति पर यह पाया गया कि ‘नियंत्रण दल’ के खिलाड़ियों की अपेक्षा, ‘प्रयोगात्मक दल’ के (ओमकार ध्यान करने वाले) खिलाड़ियों के शरीर में, खेल के बाद, पानी का स्तर पर्याप्त रूप से अच्छा था। परीक्षणों से यह भी पता चला कि ध्यान करने वाले खिलाड़ियों की शारीरिक फुर्ती तथा हृदय की धड़कनें भी बेहतर थीं। ये खिलाड़ी ज्यादा खुश और शांत थे, और खेल पर उनका ध्यान बेहतर केंद्रित था।

डॉ. लाल ने बताया, “इन खिलाड़ियों में से बहुत से मेरे पास आये और बोले कि खेल में अच्छे प्रदर्शन के अलावा उन्हें और भी लाभ मिल रहे थे। एक खिलाड़ी ने बताया कि अब घर पर सभी लोगों के साथ वह ज्यादा मेल-जोल से रह पा रहा था। इस प्रशिक्षण के दौरान इन सभी खिलाड़ियों की परिपक्वता बढ़ गयी थी। इस अध्ययन ने संभावनाओं का एक पूरा नया क्षेत्र खोल दिया है। अब हमने दो और अध्ययन करने की योजना बनायी है जिससे ईशा द्वारा सिखायी जा रही अन्य साधनाओं के लाभों पर और ज्यादा जानकारी मिल सके”।

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