भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से राम और कृष्ण ही इतने प्रसिद्ध क्यों है और बाकी 8 अवतारों की लीलाओं का वर्णन क्यों नही है?

पहले भगवान विष्णुजी के दस अवतारो के बारे मे संक्षेप में जानते हैं :-

  1. मत्स्य(मछली)-भगवान विष्णु जी ने मनु को जलप्रलय (प्रलय) से बचाने के लिए एक मछली का रूप धरण किया था, जिसके बाद वह मनु की नाव को पौधों और जानवरों की हर प्रजाति के साथ नये चक्र में ले गये, जो बड़े पैमाने पर चक्रवात में इकट्ठा हुआ था।
  2. कुर्मा (विशाल कछुआ)- जब देवता और असुर अमृत को पाने के लिए समुद्र मंथन कर रहे थे, तो वे मंडरा पर्वत का मंथन करने के लिए उपयोग कर रहे थे जिसको डूबने से रोकने के लिए भगवान विष्णु जी ने कछुए का रूप लिया था।
  3. वरहा(सूअर) – वह हिरण्यक्ष को पराजित करने के लिए प्रकट हुए थे , एक राक्षस जों पृथ्वी को ब्रह्मांड महासागर (ईथर सिद्धांत की तरह) के नीचे ले गया था। माना जाता है कि वाराहा और हिरण्यक्ष्शा के बीच लड़ाई एक हज़ार साल तक चली थी, जिसे अंत में वाराहा जीत गये। वाराहा पृथ्वी को अपने दांतों के बीच सागर से बाहर ले आए और इसे ब्रह्मांड में अपनी जगह बहाल कर दिया।
  4. नरसिम्हा(आधा मनुष्य/आधा शेर) – राक्षस हिरण्यकश्यप, हिरण्याक्ष के बड़े भाई को ब्रह्मा से एक शक्तिशाली वरदान प्राप्त था, जिसकी वजह से उसे कोई मनुष्य या जानवर द्वारा दिन या रात, पृथ्वी या सितारों पर किसी भी हथियार द्वारा नहीं मारा जा सकता था। । एक आदमी के शरीर और शेर के सिर और पंजे के साथ भगवान विष्णु जी नरसिंह अवतार के रूप में खंबे से आए। उसके बाद उन्होने घर के आंगन की सीमा पर हिरण्यकश्यप को शाम को अपने जांघों पर रखकर अपने पंजे से वध किया।
  5. वामन (बौना) – भक्ति और तपस्या के साथ, बली ,हिरण्यकश्यप के चौथे वंशज दृढ़ता के देवता इंद्र को पराजित करने में सक्षम हुये थे और तीनो लोको पर अपना अधिकार कर लिया था। देवताओं ने विष्णु से सुरक्षा के लिए अपील की और वह एक बौने ब्राह्मण के रूप में उतरे। राजा के अश्वमेध यज्ञ के दौरान, वामन , बली के पास गए । बली ने उनसे उनकी कोई भी मांग पूरी करने का वादा किया। वामन ने तीन पग भूमी के लिए कहा जिससे बली सहमत हो गया ,उसके बाद उन्होने अपने आकार को विशालकाय बना दिया और अपने पहले ही चरण में धरती और दूसरे में स्वर्ग को नाप लिया । बाली ने महसूस किया कि वामन विष्णु अवतार थे। सम्मान में, राजा ने अपना सिर पर उनसे अपने पैर रखने के लिए तीसरे स्थान के रूप में पेश किया। अवतार ने ऐसा किया और इस प्रकार बाली को अमरत्व प्रदान हुआ। फिर बाली और उनके दादा प्रहलाद की प्रशंसा में, वामन ने उन्हें पाताल का शासक बना दिया।
  6. परशुराम (फरसा के साथ योद्धा) – वह जमदग्नी और रेणुका के पुत्र है और उन्हे शिव की तपस्या के बाद फरसा(कुल्हाड़ी) मिला था । वह एक ब्राह्मण और क्षत्रिय के बीच कर्तव्यों के साथ हिंदू धर्म, या योद्धा-संत में पहले ब्राह्मण-क्षत्रिय है। राजा कार्तवीर्या अर्जुन और उनकी सेना ने अपने आश्रम में परशुराम के पिता का दौरा किया, और संत उन्हें दिव्य गाय कामधेनु के साथ खिलाने में सक्षम रहे। इसलिए राजा ने गाय की मांग की, लेकिन जमदग्नी ने इनकार कर दिया। क्रोधित राजा ने आश्रम को नष्ट कर दिया और गाये को साथ ले गये। तब परशुराम जी ने राजा को अपने महल में मार डाला और उसकी सेना को नष्ट कर दिया। बदले में, कार्तवीर्या के पुत्रों ने जमदग्नी की हत्या कर दी। परशुराम ने पृथ्वी पर प्रत्येक क्षत्रिय को मारने के लिए शपथ ली और उनके खून से पांच झीलों को भर दिया। आखिरकार, उनके दादा, ऋषि रुचेका, उनके सामने उपस्थित हुए और उन्हें रोक दिया। वह एक चिरंजीवी (अमर) है, और आज भी माना जाता है की वो महेंद्रगिरी पर्वत पर तपस्या कर रहे हैं ।
  7. राम(अयोध्या के राजकुमार और राजा)- वह हिंदू धर्म में आम तौर पर पूज्य अवतार है, और उन्हे एक आदर्श और वीर पुरुष के रूप में माना जाता है। उनकी कथा हिंदू धर्म ग्रंथ , रामायण में सुनाई गई है। उनकी धर्मपत्नी सीता का अपहरण लंका के राक्षस राजा रावण ने कर लिया था। वह लंका गये और राक्षस राजा को मारकर सीता को बचाया।
  8. कृष्ण के बड़े भाई बलराम, को आम तौर पर शेश का अवतार माना जाता है। हालांकि, बलराम को श्री वैष्णव सूचियों में विष्णु के आठवें अवतार के रूप में शामिल किया गया है, जहां बुद्ध को छोड़ दिया गया है और कृष्ण इस सूची में नौवें अवतार के रूप में प्रकट होते हैं। वह विशेष रूप से उन सूचियों में शामिल है जहां कृष्णा को हटा दिया जाता है और सभी का स्रोत बन जाता है।कृष्ण देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र थे। हिंदू धर्म में अक्सर पूजा करने वाले देवता, वह विभिन्न किंवदंतियों के नायक हैं और प्रेम और चंचलता जैसे गुणों को प्रस्तुत करते हैं।
  9. बुद्ध: – बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध को हिंदू धर्म में विष्णु के अवतार के रूप में आम तौर पर शामिल किया जाता है। कभी-कभी बुद्ध को हिंदू शास्त्रों में एक उपदेशक के रूप में चित्रित किया जाता है जो वैदिक शास्त्रों के मार्ग से राक्षसों और विधर्मीयों को दूर करता है और ले जाता है, लेकिन एक और विचार उन्हें एक दयालु शिक्षक की प्रशंसा करता है जिसने अहिंसा के मार्ग का प्रचार किया।
  10. कल्कि को विष्णु के अंतिम अवतार के रूप में वर्णित किया गया है, जो प्रत्येक काली युग के अंत में दिखाई देता है। वह एक सफेद घोड़े के ऊपर होंगे और उनकी तलवार एक धूमकेतु की तरह चमकती हुई खींची जाएगी। वह प्रकट होंगे जब ,तब केवल अराजकता, बुराई और उत्पीड़न प्रचलित होगा है, धर्म गायब हो गया होगा और वह सत्य युग और अस्तित्व के एक और चक्र को पुनः आरम्भ करने के लिए काली युग को समाप्त करेंगे।
  • पहले तीन अवतार, अर्थात् मत्स्यकूर्म और वराह प्रथम महायुग में अवतीर्ण हुए। पहला महायुग सत्य युग या कृत युग है। यह सभी मात्र एक कार्य के लिए अवतरित हुये थे ।
  • नरसिंहवामनपरशुराम और राम दूसरे अर्थात् त्रेतायुग में अवतरित हुए। नरसिंह और वामन अवतार भी मात्र एक कार्य के लिए अवतरित हुये थे। परंतु राम अवतार ने अनेकों कार्य किए इस धरती की मोह माया के बीच । राम जी ने पूरा मनुष्य जीवन व्यतीत किया और अपने रामराज्य को संपन्न करने के पश्चात्य सरयू नदी के तट पर गुप्तार घाट में दैहिक त्याग कर दिया। और इसमे कोई हैरान होने वाली बात नहीं हैं ,जों जितना अधिक समय बिताता है और अधिक कार्य करता है उसे लोग भी उतना ही याद रखते है । वही परशुराम जी माता-पिताजी का पिंड दान करके तपस्या करने चले गये और उनका कार्य अभी पूर्ण भी नही हुआ है ,वह कल्कि अवतार को शिक्षा देने हेतु धरती पर अभी भी है ।अर्थात उन्होने मोह माया मे रहकर सम्पूर्ण मनुष्य जीवन व्यतीत नहीं किया।
  • कृष्णऔर बलराम द्वापर युग में अवतरित हुए। राम जी की ही तरह कृष्ण जी ने भी पूरा मनुष्य जीवन इस धरती की मोह माया के बीच व्यतीत किया और अपने द्वारका राज्य को संपन्न करने के पश्चात्य १२५ वर्षों के जीवनकाल के बाद उन्होंने अपनी लीला समाप्त की।
  • इस समय चल रहा युग कलियुग है और भागवत पुराण की भविष्यवाणी के आधार पर इस युग के अंत में कल्किअवतार होगा। इससे अन्याय और अनाचार का अंत होगा तथा न्याय का शासन होगा जिससे सत्य युग की फिर से स्थापना होगी। पर क्योंकि उन्होंने अभी जन्म लिया ही नही है तो ना ही उनकी अधिक लीलाओ का वर्णन है और ना ही वो इतने प्रसिद्ध है।

अतः मत्स्य, कूर्म ,वराह ,नरसिंह,वामन और परशुराम अवतार अधिक समय तक समाज में नही रहे इसलिए वह इतने प्रसिद्ध नहीं हुए वही राम और कृष्ण पूर्ण अवतार हैं और उन्होंने पूर्ण जीवन लोगो के बीच व्यतीत किया। बुद्ध अवतार को कई लोग गौतम बुद्ध ही मानते है तो कई मानते है कि उनका आना अभी शेष है।

अर्थात बुध और कल्कि अवतार तो अभी आये ही नही जो उतनी प्रसिद्धि अभी उन्हें प्राप्त नही हुई है।

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