हमारी मृत्यु से पहले हमें क्या संकेत मिलते हैं?

मौत से पहले बनते हैं ऐसे हालात, श्रीकृष्ण ने बताए थे कुछ खास रहस्य-

मृत्यु का भय

मृत्यु का भय शायद इस सृष्टि का सबसे बड़ा भय है। हर किसी को यह डर सताता रहता है कि आज नहीं तो कल उसे इस मोह माया के बंधन को तोड़कर जाना ही होगा, अब ना जाने वह पल कब आएगा और कैसे आएगा।

भौतिक संसार

जिस क्षण मनुष्य इस भौतिक संसार में जन्म लेता है उसी क्षण से उसके मृत्यु का समय, तारीख और कारण, सब कुछ निश्चित हो जाता है। आप कह सकते हैं जन्म के समय से ही मृत्यु के लिए उलटी गिनती भी शुरू हो जाती है।

मृत्यु

मृत्यु एक ऐसा विषय है जो हमेशा से ही इंसानी मस्तिष्क के लिए जिज्ञासा का केन्द्र रहा है। मृत्यु से पहले होने वाले आभास, मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, पूर्वजन्म और पुनर्जन्म का सत्य, आदि कुछ ऐसे सवाल हैं जो हर किसी को परेशान करते हैं।

भूत-प्रेत

यही वजह है कि विज्ञान जो हमेशा भूत-प्रेत और आत्माओं जैसी बातों को नकारता रहा है, उसके आधार पर भी आत्मा के शरीर से बाहर निकलने और फिर उसकी आगे की यात्रा पर शोध करने लगे हैं।

विज्ञान

विज्ञान तो आज मृत्यु और उसके हालातों पर ध्यान आकर्षित करने लगा है लेकिन हमारे पुराणों में मृत्यु से जुड़ा लगभग हर रहस्य उजागर किया गया है।

गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण, जिसका संबंध जीवन से लेकर मृत्यु और उसके बाद आत्मा के सफर तक के हर पड़ाव से है, के अलावा भी कई ऐसे ग्रंथ हैं जिसमें मृत्यु के रहस्यों को उजागर किया गया है।

जीवित अवस्था

मृत्यु के पश्चात घर में गरुड़ पुराण का पाठ करवाना आवश्यक करार दिया गया है। मौत के बाद जब आत्मा शरीर छोड़ देती है तो उसकी यात्रा कैसी होती है, जीवित अवस्था में किए गए कर्मों का दंड और फल उस आत्मा को क्या और कैसे मिलता है, किस पाप की क्या सजा निश्चित की गई है, यह सब गरुड़ पुराण में उल्लिखित है।

भगवान शिव

हमने पहले आपको भगवान शिव द्वारा बताए गए मृत्यु पूर्वाभासों के विषय में अवगत करवाया था, आज हम आपको श्री कृष्ण द्वारा बताए गए मृत्यु के रहस्यों के विषय में बताएंगे जिनका उल्लेख भी गरुड़ पुराण में किया गया है।

भगवान कृष्ण

गरुड़ पुराण में भगवान कृष्ण ने बताया है कि कैसे मनुष्य के अपने कर्म उसकी मृत्यु, मृत्यु के हालातों को और साथ ही आत्मा को मिलने वाले फल को प्रभावित करते हैं।

जीवन का अंत

भगवान कृष्ण के अनुसार वे लोग जिन्होंने अपने जीवन में कभी किसी का बुरा नहीं किया होता, जिन्होंने हमेशा सत्य और सही के मार्ग को ही अपनाया होता है उनके जीवन का अंत बहुत शांत तरीके से होता है। उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।

आध्यात्मिक राह

आध्यात्मिक राह पर ना चलने वाले, दूसरों का बुरा करने वाले, अपने कर्मों और वचनों से दूसरों को तकलीफ पहुंचाने वाले लोगों का अंत बहुत बुरा और दर्दनाक होता है।

दूसरों का विश्वास

जो लोग दूसरों का विश्वास तोड़ते हैं, धोखा देते हैं, इसके अलावा वे लोग जो अपने जीवन में घृणित कृत्य करते हैं, उनकी मृत्यु जितनी बुरी हो सकती है, वह होती है। ऐसे लोगों को पता भी नहीं चलता और उनकी मौत उनके सामने आकर खड़ी हो जाती है।

अचेत अवस्था

बहुत से लोग ये सोचने लगे होंगे कि अचेत अवस्था में मृत्यु होना तो एक सौभाग्य की बात है। हमें दर्द महसूस भी ना हो और मृत्यु भी हो जाए, इससे बेहतर और क्या हो सकता है।

अनुभव

लेकिन जिस अवस्था की हम बात कर रहे हैं वो अवस्था ऐसी है कि आप अपने साथ घटित होने वाला कोई भी अनुभव किसी को बता नहीं पाते और ना ही किसी को सहायता के लिए बुला पाते हैं।

होने वाली मौत

इससे पहले कि आपको अपनी होने वाली मौत का आभास हो या आप अपने लिए कोई प्रयत्न कर पाएं, आपके शरीर की सारी ऑक्सीजन, आपकी अंतिम सांस तक आपका साथ छोड़ जाती है।

मौत के समय

यूं तो कभी कोई भी मनुष्य अपनी मौत के समय का अनुमान नहीं लगा सकता लेकिन कुछ ऐसे संकेत हैं जो आने वाली मौत की ओर साफ इशारा करते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो।

भूख मर जाना

संबंधित विषय पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि मृत्यु से कुछ दिन पहले व्यक्ति का खाना-पीना बंद हो जाता है, उसकी भूख-प्यास दोनों खत्म हो जाती है। यह पहला संकेत है कि अब उस व्यक्ति का अंत निकट है।

अत्याधिक कमजोरी

संबंधित व्यक्ति का शरीर इतना कमजोर हो जाता है कि वह ना तो अपने आप खड़ा हो पाता है और ना ही अपना कोई भी काम खुद कर पाने में सक्षम रहता है। मामूली से मामूली कार्य भी वह कर पाने में अक्षम हो जाता है।

नींद ना आना

नींद बिल्कुल नहीं आना, हर समय जागते रहना और शरीर में संवेदनशीलता की कमी यह दर्शाती है कि अंतिम घड़ी बहुत निकट आ गई है। आसपास रहने वाले व्यक्तियों की मौजूदगी ना तो महसूस होती है और ना ही उससे कोई अंतर पड़ता है।

बिना सोचे-समझे बोलना

जिस व्यक्ति के शरीर से प्राण निकलने वाले होते हैं उस व्यक्ति की आवाज भी अपने आप निकलने लगती है। वह बिना सोचे-समझे बोलता है या कह सकते हैं कि बड़बड़ाने लगता है। वह क्या बोल रहा है, कुछ समझ नहीं आता।

हल्का महसूस होना

संबंधित व्यक्ति को अपना शरीर बिल्कुल हल्का होने लगता है, उन्हें अपना वजन ना के बराबर प्रतीत होता है।

पारलौकिक संसार

इतना ही नहीं मृत्यु की चौखट पर खड़े व्यक्ति का भौतिक संसार से उनका मन ऊब जाता है और वो पारलौकिक दुनिया की बातें करने लगते हैं।

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