इतिहास स्वयं इस बात का साक्षी है कि भारत की भूमि बड़े-बड़े धुरंधरों की जन्मभूमि या कर्मभूमि रही है। आज भले ही कोई कुछ भी कह ले, लेकिन सच यही है कि विभिन्न क्षेत्रों में जो भी और जितनी भी उपलब्धियां हम देख रहे हैं उनकी नींव कहीं ना कहीं भारतीयों से ही जुड़ी है।
यदि सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है तो गणित की गणना के क्षेत्र में आर्यभट्ट का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने वैश्विक इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करवाया है। इन्हीं में से एक रहे आचार्य चाणक्य जिनका जन्म करीब 300 ईसा पूर्व हुआ था। आचार्य चाणक्य का संबंध पाटलिपुत्र से था, जिसे उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया।
चंद्रगुप्त को चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य बनाने वाले आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षक, दार्शनिक और ज्ञाता थे। इन सबके अलावा आचार्य चाणक्य को नीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र का जनक भी कहा जाता है क्योंकि उनके तर्कों के आगे कोई नहीं ठहरता था। आज भी बहुत से लोग आचार्य चाणक्य की नीतियों को अपना आदर्श मानकर उन्हीं पर अपना जीवन व्यतीत करते हैं। आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य ने जीवन के विषय में ऐसा क्या कहा जो लोगों के लिए आदर्श बन गया।
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति का धर्म, उसका जन्म, उसकी पहचान नहीं बन सकता। व्यक्ति के कर्म ही उसे महान बनाते हैं।
ऋण इंसान का सबसे बड़ा शत्रु होता है। अगर खुशहाल जीवन व्यतीत करना है तो व्यक्ति को ऋण की एक-एक पाई तक चुका देनी चाहिए।
मनुष्य जाति को अपने भविष्य या अतीत के बारे में नहीं सोचना चाहिए। केवल वर्तमान के विषय में सोचकर अपने जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
शिक्षा ही व्यक्ति को उत्कृष्ट बनाती है। सुंदरता और जवानी छोड़कर चली जाती है लेकिन शिक्षा एक मात्र ऐसी धरोहर है जो हमेशा साथ रहती है।
व्यवसाय से जुड़े अपने राज किसी भी व्यक्ति के साथ बांटने नहीं चाहिए, भले ही वह आपसे कितना ही निकट क्यों ना हो। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका विनाश निश्चित है।
वास्तविक ज्ञान किताबों या संपत्ति में नहीं मिलता। अगर ऐसा होता तो लोग जरूरत पड़ने पर भी कभी इनका प्रयोग ना कर पाते।
अगर कोई व्यक्ति आपका बहुत नजदीकी है, तो वह भले ही आपसे कितना ही दूर क्यों ना हो, हमेशा आपके दिल के पास रहता है। लेकिन एक बार कोई दिल से उतर जाए तो दूरी ना होने के बाद भी वह कभी नजदीकी नहीं बन सकता।
जब भी किसी कार्य की शुरुआत करो तो कुछ सवाल पहले खुद से पूछो। क्या तुम वाकई ये कार्य करना चाहते हो? क्या वाकई तुम्हें सफलता मिलेगी? यह कार्य क्यों करना चाहते हो? अगर इन सब का जवाब आपको सकारात्मक मिलता है तभी उस कार्य की शुरुआत करनी चाहिए।
इस डर से कि आप सफल होंगे भी या नहीं, किसी कार्य को अधूरा मत छोड़ो। आचार्य चाणक्य के अनुसार अपने ध्येय को हासिल करने वाला व्यक्ति इस दुनिया का सबसे खुशहाल व्यक्ति होता है।
उपयुक्त प्रशासन वो है जहां सैन्य बल से ज्यादा खजाने पर ध्यान दिया जाता है। खजाना हो तो सैन्य क्षमता बढ़ाई जा सकती है लेकिन बिना खजाने के सैन्य क्षमता किसी काम की नहीं है।
अपने धन को किसी ऐसे व्यक्ति को ही दें, जो वाकई उसकी कद्र करना जानता हो।
अपने डर से कभी भयभीत नहीं होना चाहिए। अगर आपको किसी बात का भय है तो उसका सामना कर उसे जड़ से समाप्त कर दीजिए।
सीधा खड़ा वृक्ष सबसे पहले कटता है। इसका अर्थ है कि बहुत ज्यादा ईमानदारी भी घातक सिद्ध हो सकती है, विनाश का कारण बन सकती है।
भगवान को मंदिर में ढूंढ़ने से कोई फायदा नहीं है। जिस शरीर में पवित्र आत्मा रहती है उस शरीर में स्वयं भगवान वास करते हैं।
आपकी जिन्दगी इतनी बड़ी नहीं है कि गलती कर-कर के सीख लें। दूसरों की गलतियों को देखो, उन्हें समझो और उनसे सीख लो।
आचार्य चाणक्य को काफी कठोर नीतिकार कहा जाता था। उनकी कठोर शिक्षा और परीक्षण ने एक सामान्य से बालक को सम्राट बना दिया था। चाणक्य की ये शिक्षाएं किसी के लिए भी संजीवनी का कार्य कर सकती हैं।