किसी भी हानि से बचने की चाणक्य नीति

विभिन्न शोधकर्ताओं ने यह माना है कि आचार्य चाणक्य की एक-एक नीति जीवन में सफलता की कुंजी है। चाणक्य की नीतियों को यदि भरपूर तरीके से उपयोग में लाया जाए, तो हम जीवन की हर एक परेशानी से बच सकते हैं।

आचार्य चाणक्य की नीतियों पर खरा उतरकर एक आम बालक चंद्रगुप्त मौर्य साम्राज्य का सम्राट बना था, तो हम भी इन नीतियों का उपयोग करके कम से कम अपने जीवन को तो सफल बना ही सकते हैं। वह सब हासिल कर सकते हैं, जिसके प्रति हम स्वप्न देखते हैं।

हमारे प्लेटफार्म द्वारा पहले ही आचार्य चाणक्य की कई नीतियों पर चर्चा की जा चुकी है। जिसमें से कुछ जीवन में सफल होने के काम आती हैं तो कुछ हमें चाणक्य की दृष्टि से इंसान एवं खासतौर से महिलाओं की सही पहचान करने में सहायक सिद्ध होती हैं। लेकिन आज हम आपको चाणक्य की उन नीतियों के बारे में बताएंगे जो आपको नुकसान से बचाएंगी।

यह चाणक्य नीतियां धन के नुकसान से लेकर, अन्य सभी नुकसानों से बचाती हैं जो हमें जीवन में सफलता प्राप्त कराएं। जानिए आगे की स्लाइड्स में क्या करें और क्या नहीं, कि हमें कोई भारी नुकसान ना झेलना पड़े।

नीति नंबर 1

चाणक्य की इन नीतियों में पहली नीति है – “भाई-बंधुओं की परख संकट में और जीवन साथी की परख धन नष्ट होने पर होती है”। यानि कि जब भी हम परेशानी में हों और कोई दोस्त हमें सहारा दे तो वही हमारा सच्चा मित्र है। अन्यथा सुख में तो हर कोई साथ खड़ा होता है लेकिन दुख में सहारा देने वाला इंसान ही सच्चा इंसान कहलाता है।

इसी तरह से हमारे अपने जीवन साथी यदि हमारी जरूरतों और हमारे धन को संजोये रखने की कला नहीं समझते, तो वे हमारे साथ जीवन काटने के लायक नहीं हैं। ऐसे साथ आगे चलकर हमें नुकसान ही पहुंचाते हैं।

नीति नंबर 2

“कभी भी अपनी राज़ की बातें किसी को भी बतानी नहीं चाहिए, यह आदत हमें बर्बाद कर सकती है”… आचार्य चाणक्य ने सही तो कहा है, जब हम अपने दिल की बात किसी एक से भी बांट लेते हैं तो वह कभी राज़ नहीं रहती। वह बात आग की तरह सारे गांव (समाज) में फैल जाती है। और हमारे रहस्य यदि सबको मालूम हो जाएं, तो तभी से हमारे पतन का समय आरंभ हो जाता है।

नीति नंबर 3

“सभी कष्टों से बड़ा कष्ट पराए घर में रहने का है”…. इतिहास गवाह है इस बात का, कि मनुष्य अपनी खुद की वस्तु पर ही हक़ जता सकता है, अन्यथा दूसरे की वस्तु इस्तेमाल करने से वह एहसानमंद हो जाता है।

नीति नंबर 4

“किसी भी व्यक्ति को बहुत ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए, क्योंकि बहुत ज्यादा ईमानदार व्यक्ति को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं”… आचार्य की इस बात को हम उदाहरण सहित समझा सकते हैं। जंगल में काफी सारे पेड़ होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेड़ काटने वाले सबसे पहले किस पेड़ को काटते हैं?

वह पेड़ जो देखने में मजबूत हो और सीधा हो, उसे सबसे पहले काटा जाता है क्योंकि उसे काटने में कोई समस्या नहीं होती। इसी प्रकार से मनुष्य का स्वभाव भी है, जो सबसे ज्यादा सीधा और ईमानदार होता है, लोग उसी को अधिक कष्ट देते हैं। क्योंकि वे जानते हैं कि चालाक इंसान उनकी बुरी भावना को समझ जाएंगे।

नीति नंबर 5

नीति नंबर 5

“हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं है, जिसके पीछे लोगों के स्वार्थ ना छिपे हो। यह कटु सत्य है, लेकिन सत्य यही है”…. आचार्य चाणक्य के इन वचनों का बहिष्कार सभी करते हैं, क्योंकि जो सच्चे मित्र हैं वे इस बात को मानते नहीं हैं।

लेकिन यदि इस वचन को गहराई से समझा जाए तो इसमें सकारात्मक सोच भी छिपी है। यदि किसी की मित्रता बिल्कुल सच्ची है, उसमें कोई दोष नहीं है फिर भी वहां स्वार्थ छिपा है। स्वार्थ एक अच्छा मित्र बनने का, स्वार्थ मित्रता को पाने का तथा आखिरी स्वार्थ मित्रता से मिलने वाले प्रेम को पाने का।

नीति नंबर 6

“यदि कोई सांप जहरीला नहीं है, तब भी उसे फुंफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। इसी तरह यदि कोई व्यक्ति कमजोर है, तो उसे खुद को ताकतवर प्रदर्शित करना चाहिए”…. आचार्य की यह बात हमें केवल इतना समझाती है कि कमजोर व्यक्ति की हमेशा ही हार होती है, इसलिए अपनी कमजोरी को प्रदर्शित ना होने दें।

नीति नंबर 7

“ऐसा धन जो बहुत ज्यादा तकलीफ के बाद या फिर अपना धर्म-ईमान सब छोड़ने के बाद हासिल हुआ है, ऐसा धन स्वीकार नहीं करना चाहिए”… यह तो हमारी शास्त्रीय मान्यताएं हैं कि गलत तरीके से कमाया हुआ धन कभी भी हमारे अच्छे कार्यों को सफल नहीं बनाता। यह हमारी बर्बादी का सबब ही बनता है।

नीति नंबर 8

“जो बीत गया, सो बीत गया। यदि हमसे कोई गलत काम हो गया है तो उसकी चिंता ना करते हुए वर्तमान को सुधारकर भविष्य को संवारना चाहिए”… जीवन की सफलता इसी वचन में छिपी है, यदि हम बीते हुए कल से ही बंधे रहेंगे तो कभी आगे नहीं बढ़ सकेंगे।

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