चाणक्य के 12 अमर वाक्य

दूसरों की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी।

अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे दंश भले ही न दो पर दंश दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए।

हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है, यह कड़वा सच है।

भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये इस पर हमला कर दो यानी भय से भागो मत इसका सामना करो।

दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है।

काम का निष्पादन करो, परिणाम से मत डरो।

सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है।

ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ।

व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से नहीं।

अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो। छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो। सोलह साल से उनके साथ मित्रवत व्यवहार करो। आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है।”

अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण एक समान उपयोगी है।

शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है। शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य दोनों ही कमजोर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *