चिंता और निर्बलता से उपजती है अनिद्रा

भागदौड़ और तनाव से भरी इस जिंदगी में अनिद्रा एक भयंकर समस्या का रूप धारण करती जा रही है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में तो इसकी व्यापक चर्चा होती ही है, प्राचीन ग्रंथों में भी अनिद्रा को महारोग बताया जाता रहा है। विदुर नीति में महाराज धृतराष्ट्र और विदुर के बीच हुए संवाद में इसके कारण और उपचार का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिलता है। महाराज धृतराष्ट्र कहते हैं, ‘हे विदुर, संजय लौट आया है। उसने मुझे फटकार लगाई है। कल वह भरी सभा में अजातशत्रु का संदेश देगा। मैं समझ नहीं पा रहा कि वह संदेश क्या होगा? इस चिंता के कारण मेरा तन जल रहा है। मुझे नींद नहीं आ रही है।’ मेरा तन जल रहा है और अनिद्रा की स्थिति उत्पन्न हो गई है- यह वाक्य चिंता और उससे उपजी अनिद्रा के उदाहरण के रूप में प्रासंगिक है। जब कभी हम चिंतित होते हैं, तो शरीर जलने लगता है और हम सो नहीं पाते। विदुर कहते हैं, ‘अनिद्रा उसी को सताती है जो चोर है, जिसके मन में लालच हो, जो धन-संपत्ति खो चुका हो, जो जीवन में सफलता अर्जित न कर सका हो। या फिर उस निर्बल को, जिसे किसी बलवान ने सताया हो।’ इस तरह विदुर ने अनिदा के पांच मूल कारण गिनवाए हैं। आज भी अनिद्रा के यही प्रमुख पांच कारण हैं। आयुर्वेद के अनुसार वात और पित्त बढ़ जाने से अनिद्रा की स्थिति आती है। वात-पित्त मानसिक तनाव के कारण बढ़ता है। इसके बाद कुंठित भावनाओं का स्थान आता है। एलोपैथ में इसके कुछ दूसरे कारण भी गिनवाए गए हैं। जैसे, कब्ज, ज्यादा चाय-कॉफी और मदिरा का सेवन तथा पर्यावरण में होने वाला प्रदूषण। मौसम में होने वाले बदलाव भी इसके लिए कुछ हद तक जिम्मेदार होते हैं। अनिद्रा का उपचार दो प्रकार से किया जाता है। पहला तरीका दवा के सहारे कुछ समय के लिए इस रोग को दबाना है। दूसरे तरीके में इसे जड़ से खत्म किया जाता है। गीता, चाणक्य नीति और विदुर नीति, प्राचीन काल के इन ग्रंथों में इस संबंध में ढेरों सलाह दी गई हैं। गीता में उल्लेख है कि रणक्षेत्र में अर्जुन का मन बहुत विचलित था। वह अपने संबंधियों के साथ युद्ध करने को लेकर संशय में था। वह समझ नहीं पा रहा था कि कैसे अपनों का वध करेगा? उसने श्रीकृष्ण से कहा, ‘मेरा शरीर कांप रहा है। मेरे तीर मेरा साथ छोड़ रहे हैं। मुझे क्या करना चाहिए?’ तब श्रीकृष्ण ने उसके संशय को दूर किया। गीता के सिद्धांतों में परामर्श के ऐसे 18 सूत्र हैं, जो हमारी जीवनचर्या में सुधार लाकर नींद की बीमारी का उपचार करते हैं। चाणक्य ने अपनी पुस्तक ‘चाणक्य नीति’ में जीवनचर्या में सुधार के लिए संघर्ष को खत्म करने और दूसरों पर जीत हासिल करने के विभिन्न सूत्र दिए। विदुर के कुछ प्रमुख सूत्र इस प्रकार हैं:- उस स्थान पर नहीं रहना चाहिए, जहां व्यक्ति का सम्मान न हो, जहां वह जीविका न चला सके, जहां उसका कोई मित्र न हो और जहां वह ज्ञानोपार्जन न कर सके। साथ ही, उसे अपनी योजना को गुप्त रखना चाहिए और भीतर ही भीतर उसे मूर्त रूप देने की दिशा में उचित सलाह से कार्य करते रहना चाहिए। इसके अलावा इन बातों पर बार-बार गौर करना चाहिए- उचित समय, सही मित्र, सही स्थान, आय का सही तरीका, उचित खर्च और उस व्यक्ति के बारे में, जिसने आपको शक्तिमान बनाया है। इसी तरह बुद्धिमान व्यक्ति को कभी धन की हानि, अपनी पत्नी के दुराचरण, प्रतिष्ठा को हुए नुकसान और दूसरों द्वारा कही गई मूल बातों को प्रकट नहीं करना चाहिए। अनिद्रा दूर करने का एक तरीका ध्यान भी है। योग वशिष्ठ और पतंजलि, दोनों ने उपचार का यह तरीका सुझाया था। इनके द्वारा सुझाया गया योग सिद्धांत व्यक्ति को अपनी वर्तमान स्थिति पर ध्यान केंदित करने की सलाह देता है। इस सिद्धांत के मुताबिक, सुबह और शाम लगभग 20 मिनट तक किए गए योगासनों के जरिए शरीर को उतना ही लाभ पहुंचाया जा सकता है, जितना सात घंटे की नींद लेने से होता है।

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