आप भी बुद्ध बन सकते हैं

बुद्ध नाम को अक्सर गौतम बुद्ध से जोड़ा जाता है। लेकिन बुद्ध बनना एक संभावना है जो हर मनुष्य के भीतर है। बुद्ध का अस्तित्व मन, विचार और भावनाओं से परे होता है। मन से परे जाना ही मन की सभी परेशानियों से मुक्ति का एकमात्र तरीका है।आध्यात्मिक रास्ते पर विकास करने वाला व्यक्ति गौतम को अनदेखा नहीं कर सकता क्योंकि उनकी उपस्थिति बहुत असरदार बन गयी है। उनके अपने जीवन में चालीस हजार भिक्षु बाहर जाकर उनके ज्ञान और आध्यात्मिक प्रक्रिया को फैला रहे थे।उन्होंने अपने शांतिपूर्ण तरीके से दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। वह पृथ्वी के सबसे महान आध्यात्मिक लहरों में से एक रहे हैं। योग संस्कृति में बुद्ध पूर्णिमा का दिन हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है और किसी भी आध्यात्मिक जिज्ञासु के लिए यह बहुत शुभ दिन रहा है। अब गौतम बुद्ध के सम्मान में इस दिन का नाम उनके नाम पर रख दिया गया है। 2500 साल पहले इसी पूर्णिमा को एक आदमी एक जीव के रूप में विकसित हुआ था।

बुद्ध बन सकते हैं आप भीहालांकि लोग आम तौर पर बुद्ध शब्द को गौतम के साथ जोड़ते हैं, मगर वह इकलौते बुद्ध नहीं हैं। इस धरती पर हजारों बुद्ध हुए हैं और अब भी हैं। ‘बु’ का अर्थ है, बुद्धि। जो अपनी बुद्धि से ऊपर उठ चुका है, जो अब अपने मन या दिमाग का हिस्सा नहीं है, वह बुद्ध है।फिलहाल, ज्यादातर लोग बस विचारों, भावनाओं, मतों और पूर्वाग्रहों की एक गठरी है। कृपया ध्यान दीजिए, जिसे आप ‘मैं’ समझते हैं, वह बस उन चीजों का एक मिश्रण है, जो आपने बाहर से इकट्ठा की है। जैसी भी स्थितियां आपके सामने आईं, आपने उसी तरह की व्यर्थ बातें अपने दिमाग में जमा कर लीं। आपका दिमाग समाज का कूड़ेदान है क्योंकि आप चुन नहीं सकते कि आपको क्या ग्रहण करना है और क्या नहीं। जो भी उस रास्ते से गुजरता है, आपके दिमाग में कुछ न कुछ फेंक जाता है। आप चाहें तो इस बकवास को दिव्यता की तरह सुरक्षित रख सकते हैं मगर वह कोई दिव्यता नहीं बन जाएगा, यह बस एक साधारण सा दिमाग है। जीवन का अनुभव करने और जिसे आप मन कहते हैं, उस प्रक्रिया से परे जाने का एक और तरीका है। इसके लिए आपको बस कूड़ेदान को बंद करके एक ओर रखना होता है।मन बहुत अद्भुत चीज है, लेकिन यदि आप उसमें अटक गए तो वह आपको लगातार छलता रहेगा। अगर आप मन में अटके रहने वाले इंसान हैं, तो आप लगातार दुखी रहेंगे, आप इससे बच नहीं सकते। कष्ट या पीड़ा से आप बच नहीं सकते। हो सकता है कि सूर्यास्त देखते समय वह आपको इतना खूबसूरत लगे कि आप सब कुछ भूल जाएं, मगर आपका दुख किसी पूंछ की तरह ठीक आपके पीछे बैठा रहेगा। आप जैसे ही मुड़ कर देखेंगे, वह आपके पीछे होगा। जिसे आप ‘मेरी खुशी’ कहते हैं, वह ऐसे पल हैं, जब आप अपने दुख को भूल जाते हैं। जब तक आप मन में मौजूद होंगे, भय, बेचैनी और संघर्ष से बच नहीं सकते, मन का स्वभाव ही यह है।मन से नीचे न जाएंलोग मन की यातना को नहीं झेल पाते, इसलिए उन्होंने समाज में मन के नीचे जाने के कई तरीके गढ़ लिए हैं। डट कर खाना, शराब, इंद्रिय सुखों में डूबे रहना, ये सब मन से नीचे जाने के तरीके हैं।लोग इन तरीकों का इस्तेमाल करके कुछ पलों के लिए अपनी यातना भूल जाते हैं। आप बोतल पी कर सो जाते हैं। कुछ घंटों के लिए आपका मन आपको परेशान नहीं करता क्योंकि आप मन के नीचे चले जाते हैं। आपको बहुत सुख मिलता है और बहुत राहत मिलती है क्योंकि आपके मन की यंत्रणाएं अचानक से गायब हो जाती हैं। इसलिए आपको इसकी लत लग जाती है।मगर विकास प्रक्रिया की प्रकृति ऐसी है कि यह जीव जो मन के नीचे था, अब मन में पहुंच गया है। अगर वह मुक्त होना चाहता है, तो उसे मन के परे जाना होगा। विकास प्रक्रिया में पीछे जाने जैसी कोई चीज नहीं होती। अगर आप किसी रसायन का इस्तेमाल करके मन के नीचे जाते हैं, तो आप देखेंगे कि जीवन की सच्चाई हमेशा ज्यादा तीव्रता से तब आपके सामने आती है, जब उस रसायन का असर समाप्त हो जाता है। हमेशा ऐसा ही होता है। दुख बढ़ जाता है। योग की प्रक्रिया यह देखने के लिए है कि मन से परे कैसे जा सकते हैं। जब आप मन से परे होते हैं, तभी आप अपने असली रूप में हो सकते हैं।

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