ध्यान के ५ रहस्य | 5 well-kept secrets of meditation

ध्यान के रहस्य | Secrets of meditation

जन्म से पूर्व ध्यान |Prenatal meditation

ध्यान में आराम |Comfort of meditation

ध्यान जीवन चक्र है | Meditation in the cycle of life

आत्मा के लिए आवश्यक पोषण | Essential nutrient for the soul

प्रत्येक आत्मा साधक है | Every soul is a seeker

 

जन्म से पूर्व ध्यान |Prenatal meditation

क्या ध्यान एक विदेशी घटना है? बिल्कुल नहीं! आप तबसे ध्यान कर रहे हो जब आपका जन्म भी नहीं हुआ था। जब आप अपनी माता के गर्भ में थे, कुछ नहीं कर रहे थे, आपका भोजन सीधे आपके पेट में पहुंच रहा था, उसको चबाना भी नहीं पड़ता था, तुम प्रसन्नता से पानी में तैरते थे, करवट लेते थे, पैर चलाते थे और वास्तव में बस तुम थे! यह ही ध्यान था! तुम कुछ नहीं करते थे, सबकुछ आपके लिए अपने आप हो जाता था। तो यह सब मनुष्य की प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है, प्रत्येक आत्मा की यही इच्छा होती है कि वह संपूर्ण विश्राम में रहे।

ध्यान में आराम | Comfort of meditation

आपको पता है कि आप विश्राम क्यों करना चाहते हो? क्योंकि आप किसी एक बिंदु पर आराम पाते हो- आप जिस स्थिति में विश्राम का अनुभव करते हो उसी को ध्यान कहते हैं। और आप उसको बार-बार प्राप्त करना चाहते हो। ध्यान पूर्ण विश्राम है, तो वापस उस स्थिति में आना जिसका पहले भी अनुभव कर चुके हो, इस दुनिया की उथल पुथल में पहुंचने से पहले, यह बहुत प्राकृतिक है। इस दुनिया की हर वस्तु का एक चक्र है और अंत में यह अपने मुख्य स्त्रोत से मिलना चाहती है। यह दुनिया का प्राकृतिक स्वभाव है।

ध्यान जीवन चक्र है| Meditation in the cycle of life

शरद ऋतु में सारे पत्ते झड़ कर मिट्टी में गिर जाते हैं और प्रकृति अपने संचालित तरीके से उनको दोबारा से परिवर्तित कर देती है। यह मनुष्य का एक प्राकृतिक स्वभाव है कि जीवन में प्रतिदिन के अनुभव को इकट्ठा करके छाप के रूप में हम दोबारा से दोहराते हैं। और बाद में उसे उस से निकलना चाहते हैं। और वापस अपने प्राकृतिक स्वरूप में आना चाहते हैं। जिस स्वरुप में हम इस दुनिया में आए थे। ध्यान की अवस्था में। ध्यान ताजगी, जीवंतता और शांति में वापस आना है, जो कि आपकी प्राकृतिक स्थिति है। यह पूर्णतया उल्लास और प्रसन्नता की स्थिति है!

आत्मा के लिए आवश्यक पोषण | Essential nutrient for the soul

ध्यान उत्तेजना रहित प्रसंता है, चिंता रहित रोमांच और घृणा रहित प्रेम है। यह आत्मा के लिए प्रमुख भोजन है। जिस प्रकार शरीर को जब भूख लगती है तो भोजन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार आत्मा की आवश्यकता ध्यान है।

प्रत्येक आत्मा साधक है | Every soul is a seeker

इस ग्रह पर एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो कि साधक ना हो। लोग या तो इससे परिचित न हो या इसको न पहचानते पर वह सब उसी मायावी विश्राम की खोज में है जो कि ध्यान के रहस्य में छुपा हुआ है। कठिनाई यह है कि वह इस सुख की खोज गलत जगह पर कर रहे हैं। यह ऐसे ही है जैसे कि आपको अपनी कार में हवा भरवानी है और आप किराने की दुकान पर पहुंच गए! वहां पर आपका काम पूरा नहीं होगा। उसके लिए आपको पेट्रोल पंप पर जाना पड़ेगा। तो, आपको सही दिशा चाहिए। श्री श्री रवि शंकर का निर्देशित ध्यान मन को सही दिशा दिखाता है।

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