क्या हुआ जब मिले योगी और फौजी ?

योग जीवन में किस तरह का रूपांतरण ला सकता है, इसे शब्दों से नहीं, बल्कि अपने जीवन के माध्यम से ही सबसे उत्तम ढंग से बताया जा सकता है। आइए कैद करते हैं सद्‌गुरु की सियाचिन यात्रा के कुछ यादगार लम्हों को।

1. जवानों ने कभी नहीं सोचा था कि सद्‌गुरु इतनी दूर तक खुद गाड़ी ड्राइव करके पहुंचेंगे। दरअसल, उस इलाके में सेना के जवान तक ड्राइव नहीं करते। उन्हें बेहद प्रशिक्षित ड्राइवर द्वारा लाया व ले जाया जाता है। सद्‌गुरु की गाड़ी से आगे सेना की जो पायलट आर्मी कार चल रही थी, उसका ड्राइवर हर दो-तीन घंटे बाद बदला जाता था। लेकिन सेना के अधिकारी उस समय यह जानकर हैरान रह गए कि सद्‌गुरु ने वहां तक पहुंचने के दौरान पूरे समय गाड़ी खुद ही चलाई। इतना ही नहीं, आगे चलने वाली पायलट कार जो काफी तेज गति से चल रही थी, सद्‌गुरु पूरे समय उससे तालमेल बनाते हुए उसके साथ चलते रहे। कोई भी आम ड्राइवर शायद ही इस गति से इस इलाके में गाड़ी चलाने का ऐसा दुस्साहस कर सकता है। हालांकि उनको यह नहीं पता था कि सद्‌गुरु उनके पीछे-पीछे चलकर दरअसल आभार प्रकट कर रहे थे, नहीं तो अगर वे चाहते तो अपने सफर के पहले घंटे में ही सेना की पायलट कार से कहीं आगे निकल जाते। लौटते समय सदगुरु ने यही किया और पायलट कार को काफी पीछे छोडक़र आगे निकल गए।

2. दूसरी बड़ी बात ये कि सियाचिन में सेना के जवान उम्मीद कर रहे थे कि इतनी लंबी ड्राइविंग के बाद सद्‌गुरु थके हुए नजर आएंगे। लेकिन सद्‌गुरु अपने पूरे जोश और उमंग के साथ नजर आए। इतना ही नहीं, उसी शाम उन्होंने उस पूरे इलाके का जायजा भी लिया। उन सैनिकों ने अपने सबसे फिट ऑफिसरों सहित किसी भी इंसान में इस तरह की ऊर्जा का स्तर नहीं देखा था।

सद्‌गुरु 20,000 फीट की ऊंचाई पर खूब सवेरे बिना दस्ताने के और बिना कानों को ढंके नजर आए। उस मौसम और माहौल में सद्‌गुरु को इस तरह से देखकर एक अधिकारी ने उनसे पूछा कि वह ऐसे कैसे रह सकते हैं? सद्‌गुरु ने जवाब दिया, ‘एक योगी से आप और क्या उम्मीद करते हैं?’

3. तीसरी बात कि सद्‌गुरु 20,000 फीट की ऊंचाई पर खूब सवेरे बिना दस्ताने के और बिना कानों को ढंके नजर आए। उस मौसम और माहौल में सद्‌गुरु को इस तरह से देखकर एक अधिकारी ने उनसे पूछा कि वह ऐसे कैसे रह सकते हैं? सद्‌गुरु ने जवाब दिया, ‘एक योगी से आप और क्या उम्मीद करते हैं?’ सेना के सभी अधिकारी ईशा के सभी स्वयंसेवियों का ऊर्जा स्तर और कर्तव्यनिष्ठा देखकर हैरान थे। योग शिक्षक शाम सात बजे सियाचिन पहुंचने के बाद कुछ ही देर में उस जगह को देखने के लिए निकल गए, जहां अगली सुबह योग का अभ्यास होना था और वे रात नौ बजे वापस लौटे। सदगुरु और बाकी सेना के अधिकारियों ने उनके लौटने का इंतजार किया और उसी के बाद सबने रात का भोजन किया। भोजन के दौरान एक अधिकारी ने सद्‌गुरु से कहा, ‘ईशा के स्वयंसेवियों के काम करने का तरीका बेहद प्रेरणादायक है। हमें उनसे बहुत कुछ सीखना होगा।’अधिकारी यह देखकर बेहद हैरान थे कि सियाचिन में महज कुछ दिनों के अनुकूलन के बाद ही सारे स्वयंसेवियों के सभी मुख्य अंग अच्छी तरह से काम कर रहे थे।

4. उस शाम को एक घटना भी घटित हुई। सेना का एक अधिकारी हमारे ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन का स्तर जांचने के लिए आया। हम सब की जांच करने के बाद वह सद्‌गुरु के पास पहुंचा और बोला, ‘सद्‌गुरु की जांच करने की कोई जरूरत नहीं है।’ इतना कहकर वह तुरंत वहां से निकल गया। अधिकारी यह देखकर बेहद हैरान थे कि सियाचिन में महज कुछ दिनों के अनुकूलन के बाद ही सारे स्वयंसेवियों के सभी मुख्य अंग अच्छी तरह से काम कर रहे थे।

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